
कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ते ही जा रही है और फिलहाल ताजा जानकारी के अनुसार भारत में यह आंकड़ा 700 से पार हो चूका है. वहीं अब तक इससे 17 लोगों की मौत हो चुकी हैं. इससे निपटने के लिए पीएम मोदी ने पूरे भारत में 21 दिनों तक लॉकडाउन की घोषणा की है. मगर बार बार लोगों के मन में एक सवाल यह आ रहा है कि आखिर इस खतरनाक वायरस से मरने वालों का अंतिम संस्कार किस तरहसे किया जा रहा है.
कोरोना वायरस से मरने वालों के अंतिम संस्कार की यह है प्रक्रिया
असल में कोरोना वायरस के चलते यदि मृतक का शव उसके घर पर पहुंचता है, या फिर उसकी शव यात्रा में लोग शामिल होते हैं, तो संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी परिस्थिति में मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार के दौरान उसके घर वाले मौजूद ना हुए हो. शायद इससे ज्यादा दर्दनाक वाकया उसके परिवार के लोगों ने अपने जीवन में कभी नहीं देखा होगा.
एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार कोरोना से 99 वर्षीय एक मृतक महिला जिसके बच्चे विदेश में रहते हैं. चूंकि, कोरोना वायरस के चलते सभी उड़ाने रद्द की जा चुकी हैं, ऐसे में उनका अपनी ही मां के अंतिम संस्कार पर पहुंच पाना नामुमकिन था. ऐसी परिस्थिति में केवल दो रिश्तेदार की मौजूदगी में उस मृतक महिला का अंतिम संस्कार किया.
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि अंतिम संस्कार का समय भी अब 6 घंटे से घटाकर एक घंटे से भी कम का कर दिया गया है. स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर और भयावह हो चुकी है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के डर से मृतकों को शव चुपचाप श्मशान पहुंच रहे हैं. सुरक्षा के कारण उनके साथ शोक मनाने वालों का हुजूम भी नहीं दिखाई देता. कुछ ऐसा ही हाल मुस्लिमों के होने वाले अंतिम संस्कार का है. यानी आप इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि हिंदू हों या फिर मुस्लिम सबकी अंतिम यात्रा फिलहाल एक जैसी हो गयी है. कोई भी व्यक्ति इस जानलेवा वायरस के फैलने का खतरे नहीं लेना चाहता.
